अमेरिका की मंदी से भारत को पक्के तौर पर होगा फायदा

इस रैली में मजबूत आउटपरफॉर्म और अन्य अनुकूल कारकों को देखते हुए, ऐसा लगता है कि भारत में अन्य विकसित देशों की तुलना में अधिक एफपीआई आ रहे हैं।

गौरतलब है कि शेष वित्त वर्ष के लिए भारतीय बाजार को लेकर दिवाम शर्मा का नजरिया सकारात्मक है। उनका मानना है कि अब तक ऊपरी स्तरों से भारी गिरावट के बाद कुछ मिडकैप आईटी कंपनियों का मूल्यांकन अच्छा दिख रहा है।

उनका मानना है कि आईटी क्षेत्र में निवेश के लिए प्रतीक्षा और निगरानी की रणनीति होनी चाहिए।

सोने की चाल के बारे में बात करते हुए दिवाम शर्मा ने कहा कि आगे चलकर एक परिसंपत्ति वर्ग के रूप में सोने को हमसे बेहतर प्रदर्शन करते देखा जा सकता है।

जो देश अपनी करेंसी को मजबूत देने पर फोकस कर रहे हैं और जो अपनी घरेलू करेंसी में कारोबार करते है वे सोने की खरीद करेंगे। 

इसके अलावा करेंसी के डिजिटाइजेशन से सोने की मांग में और इजाफा होगा।

अमेरिका में अगले कैलेंडर ईयर में मंदी की बड़ी संभावना नजर आ रही है। 

भारत सरकार अपनी नीतियों में काफी सुधार कर रही है और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है।

भारत की जनसांख्यिकीय स्थिति भी बहुत अनुकूल स्थिति में है। इससे आने वाले सालों में भारत में काफी एफडीआई देखने को मिल सकता है।

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