Share Market History In Hindi । Bse Sensex Index History Data 2022

चलिए दोस्तों आज हम लोग बात कर लेते हैं share market history in hindi । चलिए एक बार जान लेते हैं कि कैसे शुरू हुआ था स्टॉक मार्केट । या फिर history of indian stock market बारे में । एक्चुअली दोस्तों में एक इसके बारे में खुद ही पढ़ रहा था और उसके बाद मैंने सोचने लग गया कि अगर मेरे को ऐसा वाला सकती है तो क्यों ना आप लोगों को भी सवाल आ सकता है share market history in hindi क्या है और कब से शुरू हुआ था ।

Share Market History In Hindi

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Share Market History In Hindi

तो दोस्तों अगर आपको मैं पूछूं ऊपर दिए गए फोटो जो आप देख रहे हो किसकी फोटो है तो आप बेशक बता सकते हैं कोई stocks exchange की फोटो है ।

लेकिन दोस्तों स्टॉक मार्केट का पहले खुद का कोई एंड आईडेंटिटी नहीं था । उसका बन्ना भी शायद नहीं लिखा था। लेकिन दोस्तों इसका हिस्ट्री जान लेकर बाद आपको शौक लग जाएगी । ए शुरुवाता पैर लगभग 11 से शताब्दी की बात है पढ़ाई 900 साल पहले शुरुआत हुई थी पार्टिकुलर सेटअप को फ्रांस में पहले देखा गया था और यह समझा गया कि एग्रीकल्चर जो debt होते हैं ।

इंसानों के जो कर्जा होते थे उसको चुकाया जाता था अलग-अलग तरीकों से इसमें पेसिफिक अगर नाम की बात करें तो एकदम था जिसको कहा जाता था godless-change । एक बैंक का फेस था । ए प्राइवेट लेबल पे काम करता था और दोस्तों जो बैंक के जो कर्जा थे वह उस हिसाब से किसानों के साथ ओवैस ले यहां पर कोई स्टाफ नहीं था कोई वांट नहीं था ‌। ( Share Market History In Hindi )


एक्जेक्टली ऐसे नहीं शुरू हुआ था जैसे हम लोग अभी देख रहे हैं । आप समझ रहे हैं आज की तरह से देख रहे हैं । यहां पर कुछ हिस्टोरिकल आर्टिकल था जो कि इस बात को पूर्व करती है कि किसी ना किसी तरीके से इन पर्टिकुलर stock market history मैं सेटअप किया था । बनाया गया था ‌ ।

तो दोस्तों जो पहले नाम पर आता है तो और शुरू हुआ था बेल्जियम में वहां पर भी स्टॉक नहीं चलता था सिर्फ विजुअल debt लेन देन चलता था ।


लेकिन दोस्तों जब बात आई East India Company की । यह तो खैर दोस्तों आप लोगों को पता ही होगा कि स्टेट ईस्ट इंडिया कंपनी क्या है अगर नहीं पता है तो आप ।
जो ईस्ट इंडिया कंपनी का अलग-अलग मार्चन होता है जो आपने अपने जहाज पर लेकर आते थे हमारे देश या आदर्श देश में बेचते थे ।

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तो दोस्तों उनके साथ क्या होता था मान लीजिए आप एक मर्चेंट है आप जहाज में बहुत सारा सामान लेकर आए । अगर लुटेरे को पता चल जाता है था कि ए अलग देश का जहाज है तो उसको लूट लेते थे । उसको लुटेरे के द्वारा लोड किया जाता था । इसी चीज को मीट गेट करने के लिए जो अलग-अलग मर्चेंट ने मिलकर एक सेटअप किया । जिसको ईस्ट इंडिया कंपनी भी बोला जाता था।

अब इसमें क्या था कि बहुत सारे मर्चेंट एक साथ मिलकर मार्च होके उनका जो समाना था अलग-अलग जहाज पर डिवाइड कर देते थे । आज की भाषा में बोले तो कि आप आपके अंडे एक ही बास्केट में नहीं होना चाहिए अगर गिरा तो सभी टूट जाते हैं इसी तरह से । इसी टेक्नीक को उन लोगों ने यूज किया था और लुटेरे से बचने की तरकीब भी निकाली थी ताकि ज्यादा से ज्यादा लॉस ना हो । अरे लेख ज्यादातर यूरोपियन लोग ही रहते थे । ( Share Market History In Hindi )

तो ए तो चलता ही गया उसके बाद हमारा इंडिया में ईस्ट इंडिया का सक्सेस होने के बाद जो पहला नीदरलैंड में stock market banaa ओ पब्लिकली ट्रेडिंग कंपनी था उसको कहा जाता था Amsterdam Stock exchange । यह बेसी काली नेदारलैंड की राजधानी की नाम की अनुसार से किया गया था ।

इसको देखते हुए पार्टिकुलरली लंदन में 1801 में स्थापित किया London Stock exchange . फिर दोस्तों उसके बाद इनका जो पहले मार्केट में शेयर को यीशु किया गया पब्लिकली को शुरू किया गया था 1825 पे । जहां पर पूरा आपको पता ही होगा कि पहले जमाने में राजा महाराजा कैसे अपना चिट्ठी लिख दी थी उसी तरह से उसी पेपर की कॉपी में अपना शेयर लिख कर तिजोरी में डालकर एक कोने में फेंक कर रख देते थे । ( Share Market History In Hindi )

फिर इन दोनों को देखने के बाद न्यूयॉर्क में स्टाइलिश हुआ New York stock exchange । ए स्टाइलिश हुआ 1817 में उसके बाद धीरे-धीरे और देशों ने भी अपना स्टॉक एक्सचेंज बनाना चालू कर दिया । जापान का Tokyo stock exchange बना चाइना में बन The Shanghai Stock Exchange । इसको देखते हुए ईस्ट इंडिया कंपनी ऑफिस ले भारत में भी पीछे नहीं हटा और 1840 मे Bombay Stock exchange बाना।

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लेकिन पहले के जमाने में स्टॉक एक्सचेंज ऐसे नहीं काम करते थे जोड़ जोड़ के चिल्लाने के बाद शेयर का दाम बता देते थे आज कितना चढ़ा है कितना बड़ा है कितना घटा है यह सब जोर-जोर से चिल्ला के बोलती थी कि कि उस टाइम पर जा माइक भी नहीं था और ऑनलाइन भी नहीं था । अभी तो दोस्तों डिजिटल की जुगा चुका है मोबाइल ऐप खोलो और एक क्लिक में शेयर बाय कालिया लेकिन उस जमाने में बहुत दिक्कत आती थी पेपर लिखो पैसा दो काउंटर पर जाओ लाइन पर लाइन पर लगे रहो टिकट बुकिंग की तरह । ( Share Market History In Hindi )

उस टाइम पर बहुत चार्जर्स लेते थे वो कर । इसलिए लोग हर दिन में जाना पसंद करते हैं । हालांकि जिस तरह से हम लोग बताने की कोशिश करें उसी हिसाब से बहुत सी आर्डर नहीं लगता था ज्यादातर केस में शेर और बाहर के बीच में कन्वर्शन नहीं लगती थी और कोई कंपनी का शेयर का बाहर मिलता था तो चला नहीं मिलता था और कोई कंपनी का शेलार मिलता था तो उस कंपनी का बयान नहीं मिलता था ऐसी ऐसी प्रॉब्लम होती थी उस टाइम पर जो आपको हर्षद मेहता स्कैम स्टोरी में भी आपको थोड़ा सा देखने को मिलता था ।

लेकिन दोस्तों तब तेरे को पता भी नहीं था कि किस डायरेक्शन में ज्यादा है वह लोग कहां पर है एक्चुअली खत्म होगा कहां पर जाकर यह सब खत्म होगा इसका कोई भी आईडी अभी नहीं था । किसी को भी नहीं पता था कि इंडस्ट्री इतना बढ़ावा इंडस्ट्री बन सकती है । ( Share Market History In Hindi )

क्योंकि तभी की टाइम पर कोई फिजिकल एक्टिविटी या कोई प्रोडक्टिविटी नहीं था और ज्यादा तो टाइम यह भी नहीं पता होता था कौन खरीद रहा है कौन बेच रहा ।

इनका बीच में एक मेडल माल बैठा था जिसमें वह लोग खरीद खरीद कर रहे थे। अलग-अलग कंपनी की स्टॉक्स और बाया रोड सिल्वर को वहां पर ले कर आना भी बहुत मुश्किल था । क्योंकि उनको भी ज्यादा नॉलेज नहीं थी कि क्या खरीदना चाहिए क्या नहीं खरीदना चाहिए ।
समय बीत गए और स्टॉक मार्केट तेजी से डेवलपमेंट करते गए ।

तो दोस्तों जैसे आप लोगों को पता होता है किक कोई भी आदमी हंसी खुशी होता है तो उसका रोना भी एक दिन ना एक दिन पड़ता है इसी तरह से stock market crash भी होता है यह हम सब लोग को पता है । तो सबसे पहला स्टॉक मार्केट क्या हुआ था 1930 में । ( Share Market History In Hindi )

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एक शेयर बाजार, इक्विटी बाजार, या शेयर बाजार खरीदारों और शेयरों के विक्रेताओं का एकत्रीकरण है (जिसे शेयर भी कहा जाता है), जो व्यवसायों पर स्वामित्व के दावों का प्रतिनिधित्व करते हैं; इनमें सार्वजनिक स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध प्रतिभूतियों के साथ-साथ केवल निजी तौर पर कारोबार किए जाने वाले स्टॉक शामिल हो सकते हैं,

जैसे कि निजी कंपनियों के शेयर जो इक्विटी क्राउडफंडिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से निवेशकों को बेचे जाते हैं। शेयर बाजार में निवेश अक्सर स्टॉक ब्रोकरेज और इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से किया जाता है। निवेश आमतौर पर निवेश की रणनीति को ध्यान में रखकर किया जाता है। ( Share Market History In Hindi )

स्टॉक को उस देश द्वारा वर्गीकृत किया जा सकता है जहां कंपनी का अधिवास है। उदाहरण के लिए, नेस्ले और नोवार्टिस स्विट्जरलैंड में अधिवासित हैं और छह स्विस एक्सचेंज में कारोबार करते हैं, इसलिए उन्हें स्विस शेयर बाजार के हिस्से के रूप में माना जा सकता है, हालांकि शेयरों का कारोबार अन्य देशों में एक्सचेंजों पर भी किया जा सकता है, उदाहरण के लिए, अमेरिकी डिपॉजिटरी के रूप में अमेरिकी शेयर बाजारों पर रसीदें (एडीआर)। ( history of indian stock market )

Size Of The Stock Markets

दुनिया भर में इक्विटी समर्थित प्रतिभूतियों का कुल बाजार पूंजीकरण 1980 में 2.6 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2019 के अंत में 83.54 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया। उसके बाद 31 दिसंबर, 2019 तक, दुनिया भर में सभी शेयरों का कुल बाजार पूंजीकरण लगभग US$70.75 ट्रिलियन कुछ महीनों में हो गया था। ( history of indian stock market )

2016 तक, दुनिया में 60 स्टॉक एक्सचेंज हैं। इनमें से 16 एक्सचेंज हैं जिनका बाजार पूंजीकरण $1 ट्रिलियन या उससे अधिक है, और उनका वैश्विक बाजार पूंजीकरण का 87% हिस्सा है। ऑस्ट्रेलियन सिक्योरिटीज एक्सचेंज के अलावा, ये सभी 16 एक्सचेंज उत्तरी अमेरिका, यूरोप या एशिया में हैं।

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देश के अनुसार, जनवरी 2021 तक सबसे बड़े शेयर बाजार संयुक्त राज्य अमेरिका (लगभग 55.9%) में हैं, इसके बाद जापान (लगभग 7.4%) और चीन (लगभग 5.4%) हैं।

आजादी से 107 साल पहले शेयर बाजार की शुरुआत हुई थी।  लेकिन उस समय तरीका बिल्कुल अलग था।  1840 में पहली बार मुंबई में एक बरगद के पेड़ के नीचे 22 लोगों के साथ शेयर बाजार की शुरुआत हुई थी।  सभी दलाल मुंबई के टाउन हॉल के पास बरगद के पेड़ के नीचे इकट्ठा होते थे और शेयरों का व्यापार करते थे।  हालांकि कुछ साल बाद ये दलाल महात्मा गांधी रोड पर बरगद के पेड़ के नीचे जमा होने लगे।  धीरे-धीरे शेयर दलालों की संख्या बढ़ती गई। ( history of indian stock market )

कैसे बना शेयर बाजार

एशिया के सबसे पुराने एक्सचेंज की स्थापना का श्रेय चार गुजराती और एक पारसी शेयर दलाल को जाता है।  ये सभी 1840 के आसपास अपने व्यापार के सिलसिले में मुंबई के टाउन हॉल के सामने एक बरगद के पेड़ के नीचे मिलते थे। इन दलालों की संख्या साल-दर-साल बढ़ती रही।  1875 में उन्होंने अपना नेटिव शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स एसोसिएशन बनाया।  दलाल स्ट्रीट पर एक ऑफिस भी खरीदा। ( history of indian stock market )

आजादी के बाद bse मे किटना आया बदलाव

आजादी के 10 साल बाद 31 अगस्त 1957 को बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज को भारत सरकार द्वारा सुरक्षा अधिनियम के तहत लाया गया था।  वर्ष 1980 में बीएसई को दलाल स्ट्रीट में स्थानांतरित कर दिया गया था। 

1986 में एक्सचेंज पर SNP, BSE और Sesex जैसे इंडेक्स बनाए गए।  इसे 2000 में डेरिवेटिव बाजार के लिए खोला गया था। Dolex-30 को 25 जनवरी 2001 को लॉन्च किया गया था। इसे BSE का डॉलर लिंक्ड वर्जन कहा जाता है।  साल दर साल विस्तार के बाद आज यहां हर काम तकनीक से होता है। ( history of indian stock market )

SEBI की स्थापना

  1980 के दशक तक, बीएसई बहुत कम पारदर्शिता के साथ काम करता था।  इस दशक के अंत तक आर्थिक विकास के लिए एक नई आर्थिक शक्ति, एक आधुनिक वित्तीय प्रणाली की आवश्यकता थी।  फिर 1988 में भारत सरकार ने भारतीय प्रतिभूति विनिमय बोर्ड( SEBI ) की स्थापना की।

 
BSE की शुरूआत

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bse kaise banaa Hai

आज Bumbai Stock exchange (BSE) 146 साल का हो गया है।  बीएसई की स्थापना 9 जुलाई 1875 को हुई थी। यह एशिया का पहला और सबसे तेज स्टॉक एक्सचेंज है।  करीब 41 साल पहले 100 आधार अंकों से शुरू हुआ बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स आज 53,000 के पार पहुंच गया है।  यानी सेंसेक्स करीब 530 गुना चढ़ चुका है। ( history of indian stock market )

  शेयर बाजार एक बरगद के पेड़ के नीचे 318 लोगों द्वारा 1 रुपये के प्रवेश शुल्क के साथ शुरू किया गया था। डॉलेक्स -30 को Bumbai Stock exchange (BSE) द्वारा 25 जनवरी 2001 को लॉन्च किया गया था। इसे बीएसई का डॉलर लिंक्ड संस्करण कहा जाता है।

sensex index history

1986 में जब सेंसेक्स की शुरुआत हुई थी, तब इसका आधार वर्ष 1978-79 रखा गया था और आधार को 100 अंक बनाया गया था।  जुलाई 1990 में यह आंकड़ा 1,000 अंक तक पहुंच गया।  1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद, सरकार ने FDI के दरवाजे खोल दिए और व्यापार करने के कानून को बदल दिया।  बाजार मूल्य को नियंत्रणमुक्त कर दिया गया और अर्थव्यवस्था सेवा उन्मुख थी।  इससे सेंसेक्स में तेजी आई। ( history of indian stock market )

जब sensex index पहली बार बना, तब क्या बदलाव हुए

सबसे पहले सर्विस इंडस्ट्री यानी बैंकिंग, टेलीकॉम और आईटी सेक्टर की कंपनियों को शामिल किया गया।  इसके बाद 90 के दशक के अंत और 2000 के दशक की शुरुआत में आईटी कंपनियों के तेजी से विकास के कारण पुरानी कंपनियों के स्थान पर टीसीएस और इंफोसिस को शामिल किया गया। 

उदारीकरण के बाद से भारत की बड़ी कंपनियां घरेलू बिक्री पर ज्यादा निर्भर नहीं हैं।  ये सभी कंपनियां निर्यात के जरिए कारोबार बढ़ा रही हैं।  वहीं आईटी सेक्टर में आउटसोर्सिंग से इंफोसिस जैसी कंपनियों को फायदा हुआ है।  टाटा जैसी ऑटोमोबाइल क्षेत्र की कंपनियों ने यूके जैसे विकसित बाजारों में कदम रखा है । ( history of indian stock market )

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Harshad Mehta scam: मार्च 1992 में पहली बार सेंसेक्स 4 हजार के स्तर पर बंद हुआ, लेकिन उसके बाद सेंसेक्स 2,900 से 4,900 के बीच झूलता रहा और इसे 5 हजार तक पहुंचने में सात साल से ज्यादा का समय लगा।  इसकी मुख्य वजह यह थी कि इस साल हर्षद मेहता के घोटाले का खुलासा होने से शेयर बाजार में जबरदस्त बिकवाली हुई.

2006 में 10 हजार

  सेंसेक्स को 5 हजार से 10 हजार तक पहुंचने में 6 साल से ज्यादा का समय लगा।  7 फरवरी 2006 को सेंसेक्स 10,082.28 पर बंद हुआ, लेकिन अगले डेढ़ साल में सेंसेक्स 10 से 15 हजार के स्तर पर पहुंच गया।

2008 की मंदी ने बाजार का खेल बिगाड़ा

8 जनवरी 2008 को सेंसेक्स ने ट्रेडिंग के दौरान पहली बार 21 हजार के स्तर को पार किया था, लेकिन उसी साल आई अंतरराष्ट्रीय मंदी ने सारा खेल बिगाड़ दिया।  मंदी के चलते पूरी दुनिया के शेयर बाजारों के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार भी ढह गया और 10 जनवरी 2008 को सेंसेक्स 14,889.25 के स्तर पर बंद हुआ।  इस साल 16 जुलाई को सेंसेक्स 12,575.8 पर बंद हुआ था।  इतना ही नहीं नवंबर 2008 में सेंसेक्स 8,451.01 के स्तर पर पहुंच गया था।  इसके बाद सेंसेक्स को वापस 21 हजार के स्तर पर जाने में करीब 3 साल लग गए। ( history of indian stock market )

2014 में बाजार में a grand welcome to Narendra Modi.

साल 2013 में बीएसई सेंसेक्स ने पलटवार किया और 18 जनवरी 2013 को सेंसेक्स फिर से 20,039.04 पर बंद हुआ।  2014 में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में एनडीए की सरकार बनी थी.  शेयर बाजार ने भी मोदी सरकार का जमकर स्वागत किया.  16 मई 2014 को सेंसेक्स 25,364 के स्तर पर पहुंच गया था।  इसके बाद सेंसेक्स को 25 हजार से 30 हजार तक पहुंचने में तीन साल लग गए। ( history of indian stock market )

30 thousand  level sensex in the year 2017

अप्रैल 2017 के महीने में सेंसेक्स 30,133 पर पहुंच गया और अगले एक साल में ही सेंसेक्स 35 हजार के स्तर पर पहुंच गया.  17 जनवरी 2018 को सेंसेक्स 35,081 पर बंद हुआ। 30 अक्टूबर 2019 को सेंसेक्स ने 40,051 के स्तर को छुआ।

कोरोना संकट में sensex मे लागा बड़ा झटका

जनवरी 2020 में सेंसेक्स 42 हजार के करीब पहुंच गया था, लेकिन उसके बाद साल 2020 के कोरोना ने कहर बरपाना शुरू कर दिया.  और यही वजह रही कि मार्च 2020 में लॉकडाउन के बाद सेंसेक्स 25,981 पर पहुंच गया, हालांकि अप्रैल और मई के अंत से सेंसेक्स फिर से ठीक होने लगा।

15 महीने में 40 से 50 हजार का सफर

30 अक्टूबर 2019 को सेंसेक्स पहली बार 40,000 के ऊपर बंद हुआ।  विदेशी और घरेलू निवेशकों के आधार पर सेंसेक्स ने करीब एक साल में 40 से 45 हजार का सफर तय किया है।  4 दिसंबर 2020 को सेंसेक्स 45,079 पर बंद हुआ था। इसके करीब डेढ़ महीने बाद सेंसेक्स ने 21 जनवरी 2021 को 50 हजार का आंकड़ा पार करते हुए एक नया रिकॉर्ड बनाया। ( history of indian stock market )

किसने की थी बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की शुरुआत?

बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की शुरुआत 4 गुजराती और एक पारसी स्टॉकब्रोकर ने की थी।  1850 के आसपास अपने व्यवसाय के सिलसिले में वे मुंबई के टाउन हॉल के सामने एक बरगद के पेड़ के नीचे एक सभा करते थे।  इन दलालों की संख्या साल दर साल बढ़ती रही।  1875 में, उन्होंने अपना ‘द नेटिव शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स एसोसिएशन’ बनाया, साथ ही दलाल स्ट्रीट पर एक कार्यालय खरीदा।  आज इसे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज कहा जाता है।

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बीएसई के एमडी और सीईओ आशीष चौहान ने कहा कि बीएसई पिछले 146 वर्षों से अपनी स्थापना के बाद से भारत में निवेश और धन सृजन के लिए काम कर रहा है।  बीएसई की सफलता को 7.2 करोड़ से अधिक निवेशक खातों, 4,700 से अधिक पंजीकृत कंपनियों और 231 लाख करोड़ रुपये से अधिक के इक्विटी बाजार पूंजीकरण से देखा जा सकता है।  बीएसई आने वाले समय में भारत को दोहरे अंकों की वार्षिक वृद्धि हासिल करने में मदद करेगा। ( history of indian stock market )

Nse kaise banaa Hai

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1992 में, Harshad Mehta scam के कारण Bumbai Stock exchange दुर्घटनाग्रस्त हो गया।  तत्कालीन वित्त मंत्री डॉ मनमोहन सिंह ने बीएसई के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए एक और स्टॉक एक्सचेंज की आवश्यकता की बात कही थी।  National Stock exchange की शुरुआत नवंबर 1992 में हुई थी। संचालन के कुछ ही दिनों के भीतर, Nseभारत में सबसे बड़ा Stock exchange बाजार बन गया।

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